भगवान की लाठी में आवाज नहीं होती ।
ये किसने कहा, कब कहा , किस लिए कहा ये सब तो मुझे नहीं मालूम ।।
लेकिन जिस ने भी कहा होगा ,
उसने देखा होगा, वो देखा होगा प्रकृति के साथ हुए खिलवाड़ को।
वो देखा होगा निर्दोषों पर किए अत्याचार (ज़ुल्म ) को।।
आज जब पूरा विश्व , (coronavirus ) जैसी महामारी से जूझ रहा है जिसमें कितने ही निर्दोष लोग भी असह्य पीड़ा झेल रहे हैं और कितने ही दर्दनाक मृत्यु को प्राप्त हो रहे हैं।
भले ही कुछ गंदे लोग जो अपनी गंदी राजनीति में पड़कर इस भयावह स्थिति को नहीं देख रहे अथवा इसे स्वीकार नहीं कर रहे परंतु यह है बहुत भयावह।।
निश्चय ही इसे ही विनाश कहते हैं।
और यही भगवान की लाठी है जिसमें आवाज़ नहीं परन्तु
असह्य पीड़ा और अनगिनत मृत्यु देखने को मिल रही है।।

मजाक आदमी से करो, "coronavirus" से नहीं ।
ये महामारी है तेरी क्या, कितनों की हालत खराब कर दी है।।

:- सुजीत कुमार मिश्रा प्रयागराज।